फ़र्डिनेंड डी सस्यूर (Ferdinand de Saussure) का योगदान भाषाविज्ञान के क्षेत्र में असाधारण और क्रांतिकारी रहा है। स्विस भाषाविद सस्यूर ने आधुनिक भाषाविज्ञान की नींव रखी और उनके विचारों ने भाषा के विश्लेषण और अध्ययन के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। सस्यूर ने भाषा को एक संरचनात्मक प्रणाली के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसने भाषा के अध्ययन को एक नई दिशा दी।
सस्यूर के प्रमुख विचारों में से एक भाषा और वाक् के बीच का अंतर है। उनके अनुसार, भाषा (langue) एक सामाजिक संस्था है जो एक भाषाई समुदाय द्वारा साझा की जाती है और इसमें नियमों और संरचनाओं का सेट होता है। दूसरी ओर, वाक् (parole) व्यक्तिगत भाषाई गतिविधि है, जिसमें व्यक्ति अपनी भाषा का उपयोग करके संचार करता है। इस अंतर ने भाषा के सामूहिक और व्यक्तिगत पहलुओं के बीच के संबंध को स्पष्ट किया और भाषा के संरचनात्मक विश्लेषण को संभव बनाया।
सस्यूर का दूसरा महत्वपूर्ण योगदान संकेतक (signifier) और संकेतित (signified) की अवधारणा है। संकेतक वह ध्वनि, शब्द या प्रतीक है जो किसी वस्तु या अवधारणा को दर्शाता है, जबकि संकेतित वह अवधारणा है जिसे संकेतक द्वारा दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए, "वृक्ष" शब्द संकेतक है और पेड़ की अवधारणा संकेतित है। सस्यूर ने संकेतक और संकेतित के बीच संबंध को मनमाना (arbitrary) माना, अर्थात् किसी शब्द और उसके अर्थ के बीच कोई स्वाभाविक या आवश्यक संबंध नहीं होता।
भाषा की संरचना के बारे में सस्यूर के विचार भी महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, भाषा एक संरचना है जिसमें विभिन्न घटक होते हैं जो आपस में जुड़े होते हैं। इन घटकों के बीच संबंधों को समझकर ही भाषा को समझा जा सकता है। उन्होंने संक्रियात्मक द्वैतवाद (syntagmatic and paradigmatic relations) की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें संक्रियात्मक संबंध शब्दों के अनुक्रम में होते हैं, जबकि पारडिगमैटिक संबंध शब्दों के विकल्प होते हैं।
सस्यूर के विचारों ने न केवल भाषाविज्ञान के क्षेत्र में, बल्कि साहित्यिक सिद्धांत, नृविज्ञान, और समाजशास्त्र जैसे अन्य क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव डाला। उनके सिद्धांतों ने संरचनावाद (structuralism) और पश्चसंरचनावाद (post-structuralism) जैसी विचारधाराओं को विकसित करने में मदद की। सस्यूर के विचारों ने भाषा के अध्ययन के लिए एक संरचनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान किया, जिसने भाषा के विविध और जटिल पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
फ़र्डिनेंड डी सस्यूर के विचारों का प्रभाव आज भी भाषाविज्ञान के क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उनके सिद्धांतों ने भाषा के अध्ययन के नए तरीके प्रस्तुत किए और भाषाविदों को भाषा की संरचना, कार्य और विकास के बारे में गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया। सस्यूर का कार्य आज भी शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है, जो भाषा के रहस्यों को समझने और नए दृष्टिकोण विकसित करने के लिए उनके विचारों का अध्ययन करते हैं।zz