तुलसी की कविता में चित्रित जीवन-फलक
तुलसीदास हिंदी साहित्य के उन महान कवियों में से एक हैं, जिनकी कविता में भारतीय जीवन का संपूर्ण चित्रण मिलता है। उनके काव्य में धर्म, समाज, नीति, राजनीति, परिवार, स्त्री-पुरुष संबंध, वीरता, भक्ति, आध्यात्म और मानव स्वभाव जैसे विविध विषयों का समावेश है। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब है, जिसमें केवल राम के चरित्र का ही नहीं, बल्कि समस्त समाज और मानव-जीवन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। तुलसीदास ने अपनी रचनाओं में जो जीवन-फलक प्रस्तुत किया है, वह केवल धार्मिक या पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें तत्कालीन समाज का भी स्पष्ट चित्रण देखने को मिलता है। यही कारण है कि उनकी कविता न केवल आध्यात्मिक प्रेरणा देती है, बल्कि समाज और व्यक्ति को भी सही मार्ग दिखाने का कार्य करती है।
तुलसीदास की कविता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण है। उन्होंने भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया और अपने ग्रंथों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य ईश्वर की शरण में जाना है। उनकी भक्ति केवल बाहरी आडंबरों पर आधारित नहीं थी, बल्कि यह हृदय से उत्पन्न होने वाली सच्ची भक्ति थी। उन्होंने रामचरितमानस में राम को केवल एक देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत किया, जिनका जीवन एक आदर्श शासन, नीति और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। राम के चरित्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि मानव को जीवन में कैसी नीति और मर्यादा का पालन करना चाहिए। तुलसी की भक्ति केवल साधना का साधन नहीं थी, बल्कि यह समाज में नैतिकता और धर्म की पुनर्स्थापना का भी एक माध्यम थी।
तुलसीदास के काव्य में समाज और राजनीति का भी अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने तत्कालीन समाज की बुराइयों, पाखंड, जातिवाद और अन्याय को खुलकर उजागर किया। वे समाज में व्याप्त अधर्म, लोभ, अहंकार और अन्य बुराइयों की कठोर आलोचना करते हैं और उनके समाधान के रूप में धर्म और नीति का पालन करने की सलाह देते हैं। उन्होंने रामराज्य की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए एक ऐसे राज्य का चित्रण किया है, जहाँ न्याय, सत्य और धर्म की स्थापना होती है और प्रजा सुखी तथा संतुष्ट रहती है। रामराज्य केवल एक धार्मिक आदर्श नहीं है, बल्कि यह एक आदर्श शासन प्रणाली का भी प्रतीक है, जिसमें राजा प्रजा के कल्याण के लिए कार्य करता है और हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता है। यह तुलसीदास की राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें वे न्यायपूर्ण और धर्मपरायण शासन की महत्ता को प्रतिपादित करते हैं।
तुलसीदास के काव्य में पारिवारिक मूल्यों और मानवीय संबंधों का भी उत्कृष्ट चित्रण मिलता है। उन्होंने राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान जैसे पात्रों के माध्यम से पारिवारिक आदर्शों की स्थापना की है। राम और सीता का संबंध प्रेम, त्याग और समर्पण का आदर्श रूप है, जबकि लक्ष्मण का अपने बड़े भाई राम के प्रति प्रेम और सेवा भाव आदर्श भ्रातृ-स्नेह को प्रदर्शित करता है। भरत का चरित्र आत्मसमर्पण और भक्ति का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि परिवार के प्रति सच्ची निष्ठा और प्रेम कैसा होना चाहिए। तुलसीदास ने अपने काव्य में पारिवारिक जीवन की उन मूल भावनाओं को उजागर किया है, जो भारतीय समाज की विशेषता रही हैं।
तुलसीदास की कविता में मानव स्वभाव और मनोविज्ञान का भी अत्यंत सूक्ष्म चित्रण मिलता है। उन्होंने मनुष्य के स्वभाव में उपस्थित लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार, मोह और माया जैसी कमजोरियों को बहुत गहराई से देखा और उनका प्रभावशाली चित्रण किया। उनके काव्य में रावण, सूर्पणखा, कैकेयी और अन्य नकारात्मक पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि मनुष्य का पतन किन कारणों से होता है। दूसरी ओर, राम, सीता, हनुमान और भरत जैसे पात्रों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया है कि सच्चा मानव जीवन कैसा होना चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मनुष्य को अपने अंदर की बुराइयों को त्यागकर धर्म, सत्य और नीति के मार्ग पर चलना चाहिए, तभी वह अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
स्त्रियों के प्रति तुलसीदास की दृष्टि को लेकर कई प्रकार की बहस होती रही है। एक ओर जहाँ वे सीता के माध्यम से स्त्री के आदर्श रूप को प्रस्तुत करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर स्त्रियों के प्रति उनकी दृष्टि संकीर्ण भी प्रतीत होती है। उनके एक दोहे "ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी।" को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है। परंतु यदि उनके संपूर्ण साहित्य का अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने स्त्री को बहुत उच्च स्थान दिया है। सीता का त्याग, अनुसूया का तप, शबरी की भक्ति – ये सभी तुलसी की स्त्री दृष्टि को उजागर करते हैं। उनके काव्य में नारी को त्याग, प्रेम, भक्ति और शक्ति का रूप माना गया है।
तुलसीदास के काव्य में वीरता और शौर्य का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने हनुमान के चरित्र को अविश्वसनीय शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक बनाया है। हनुमान के कार्य और उनकी भक्ति तुलसीदास के काव्य में एक विशेष स्थान रखते हैं। उनके माध्यम से यह बताया गया है कि यदि व्यक्ति में समर्पण और दृढ़ संकल्प हो, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। इसी प्रकार, लक्ष्मण, सुग्रीव, जामवंत और अंगद जैसे वीर पात्रों के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जीवन में साहस, धैर्य और निष्ठा का कितना महत्व है।
तुलसीदास के काव्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसमें जीवन के हर पहलू को बहुत ही व्यापक और संतुलित रूप से प्रस्तुत किया गया है। उनकी कविता केवल धार्मिक उपदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें समाज, राजनीति, पारिवारिक जीवन, स्त्री-पुरुष संबंध, मानव स्वभाव और वीरता जैसे सभी महत्वपूर्ण विषयों का समावेश है। यही कारण है कि उनकी कविता केवल एक युग विशेष तक सीमित नहीं रही, बल्कि आज भी प्रासंगिक बनी हुई है। उनके काव्य में जो जीवन-फलक प्रस्तुत किया गया है, वह संपूर्ण भारतीय संस्कृति, दर्शन और परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी रचनाएँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज को दिशा देने वाली शिक्षाप्रद कृतियाँ हैं। वे अपने काव्य के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उसे धर्म, सत्य और नीति के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उनके काव्य में जो जीवन-दर्शन प्रस्तुत किया गया है, वह हर युग में मानवता के लिए मार्गदर्शक रहेगा।